बिहार सरकार की मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना अब सिर्फ आर्थिक सहायता की योजना नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर उद्यमी बनाने का एक चरणबद्ध मॉडल बन चुकी है। इस योजना के तहत महिलाओं को कुल दो लाख रुपये तक की मदद दी जानी है, लेकिन यह राशि एकमुश्त या सीधे बैंक खाते में नहीं मिलेगी। सरकार ने इसके लिए पांच स्पष्ट चरण तय किए हैं, जिनमें हर किस्त के साथ कड़ी शर्तें और मूल्यांकन जोड़ा गया है।
योजना के पहले चरण में अब तक राज्य की 1 करोड़ 56 लाख महिलाओं को 10-10 हजार रुपये की शुरुआती सहायता दी जा चुकी है। इस राशि का उद्देश्य महिलाओं को छोटे स्तर पर काम शुरू करने के लिए प्रेरित करना था। अब सरकार अगले चार चरणों में क्रमशः अधिक राशि देने जा रही है, लेकिन हर चरण में यह परखा जाएगा कि लाभार्थी महिला ने पैसे का उपयोग किस तरह किया और क्या वह वास्तव में रोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही है।
दूसरे चरण में 20 हजार रुपये की सहायता मिलेगी, लेकिन इसके लिए पहली किस्त के खर्च का प्रमाण देना अनिवार्य होगा। महिलाओं को पैसों के लेन-देन और खाता संचालन की बुनियादी ट्रेनिंग लेनी होगी। स्वयं सहायता समूह की बैठकों में नियमित भागीदारी, लगातार तीन माह की बचत, स्पष्ट व्यवसाय योजना और ग्राम संगठन से अनुमोदन को भी अनिवार्य शर्त बनाया गया है। साथ ही स्वयं सहायता समूह से लिए गए ऋण की समय पर अदायगी जरूरी होगी।
तीसरे चरण में 40 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी, जिसमें प्रशिक्षण की भूमिका और बढ़ जाती है। लाभार्थी महिलाओं को जीविका के माध्यम से व्यवसायिक प्रशिक्षण लेना होगा और अपने बिजनेस के विस्तार की लिखित योजना बनाकर सक्षम अधिकारी से स्वीकृति लेनी होगी। पिछले छह महीने की नियमित बचत, ऋण भुगतान में कोई चूक नहीं होना और बैंक या डाकघर खाते में लगातार तीन माह की बचत भी आवश्यक शर्तों में शामिल है। इस चरण में कम से कम एक अन्य व्यक्ति को रोजगार देना और व्यवसाय से जुड़ी संपत्तियों का बीमा कराना भी अनिवार्य किया गया है।
चौथे चरण में 80 हजार रुपये की बड़ी सहायता दी जाएगी, लेकिन यहां शर्तें और कड़ी हैं। लाभार्थी महिला को यह साबित करना होगा कि उसका व्यवसाय पिछले तीन महीनों से लगातार मुनाफा कमा रहा है। व्यवसाय से परिवार के लिए स्थायी संपत्ति का निर्माण, बीमा कवरेज और बैंक या डाकघर खाते में प्रति माह कम से कम एक हजार रुपये की नियमित बचत इस चरण की अनिवार्य शर्तें हैं।
पांचवें और अंतिम चरण में 60 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। इसके लिए ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग की ठोस रणनीति बनानी होगी और पंचायत संघ से अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा। महिला की औसत मासिक आय कम से कम आठ हजार रुपये या उससे अधिक होनी चाहिए। इसके अलावा संपत्तियों में न्यूनतम 50 प्रतिशत की वृद्धि, नियमित एफडी या आरडी बचत और स्थानीय व क्षेत्रीय बाजार से सक्रिय जुड़ाव का प्रमाण भी देना होगा।
सरकार का मानना है कि इस पांच-स्तरीय व्यवस्था से महिलाओं को सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि अनुशासन, वित्तीय समझ और उद्यमशील सोच मिलेगी। यही कारण है कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को अब बिहार में महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा और संरचित प्रयोग माना जा रहा है।